नवरत्न

नवरत्न

रत्न से तात्पर्य जवाहरात से होता है। पुरातन काल से ही भूतल / समुंद्रतल से प्राप्त होने वाले नगीने जैसे माणिक, हीरा, मूंगा, मोती आदि को रत्नो की संज्ञा प्राप्त है। भूगर्भीय यानी खनिज रत्नों की खदाने होती है। जैविक रत्नों को समुन्द्र से निकाला जाता है। प्रवाल और मुक्ता यानि मूंगा या मोती ये जैविक रत्न है। जंगली पर्वतो से प्राप्त होने वाले रत्नों को वानस्पतिक रत्न कहते हैं। मूल रूप में खानों , समुन्द्र आदि से प्राप्त होने वाले रत्नों के रवे या दाने सुंदर नहीं होते उन्हें काटकर, तराशकर सुंदर आकर्षक, चमकीला, लुभावना बनाया जाता है ताकि ज्योतिषी दृस्टि से उनकी विशिष्टता और महत्ता प्रकट हो सके एवं धारणकर्ता को चयनित, वे रत्न लाभ दे सकें।

मोती: - (चंद्र)

असली मोती धारण करने से मानसिक शक्ति का विकास, शारीरिक सौंदर्य की वृध्दि, स्त्री एवं धनादि सुखों की प्राप्ति होती है। इसका प्रयोग स्मरण शक्ति में वृध्दिकारक होता है।

मुंगा: - (मंगल)

श्रेष्ठ जाती का मूंगा धारण करने से भूमि, पुत्र एवं भाई का सुख, निरोगता आदि का प्राप्ति होती है। इसके अलावा रक्त विकार, भूत-प्रेत बाधा, दुर्बलता, हृदय रोग, मन्दाग्नि, पेट विकार आदि में लाभ होता है।

पन्ना: - (बुध)

पन्ना धारण करने से बुध्दि तीव्र एवं स्मरण शक्ति की वृध्दि होती है। विद्या बुध्दि, धन एवं व्यापार में वृद्धि के लिए लाभदायक माना गया है। जादू-टोना, रक्त विकार, पथरी, बहुमूत्र, नेत्ररोग, दमा, गुर्दे के रोग, मानसिक विफलता आदि रोगों में लाभकारी होता है।

पुखराज: - (गुरु)

पुखराज धारण करने से बल-बुध्दि स्वास्थय एवं आयु की वृद्धि होती है। वैवाहिक सुख, पुत्र संतान कारक एवं धर्म-कर्म में प्रेरक होता है। प्रेत बाधा निवारण, विवाह सुख बाधा दूर करने में सहायक होता है।

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हिरा: -

हीरा धारण करने से वंश वृद्धि, धन लक्ष्मी व संपत्ति की वृध्दि होती है। स्त्री एवं संतान सुखकारक व स्वास्थ्य में लाभ देता है। वैवाहिक सुख में भी वृध्दिकारक माना जाता है।

नीलम :-(शनि)

नीलम धारण करने से धन-धान्य, यश-कीर्ति, बुध्दि, चातुर्य, सर्विस एवं व्यवसाय में तथा वंश वृद्धि होती है। स्वास्थ्य सुख का लाभ होता है। नीलम चौबीस घंटे में अपना प्रभाव शुरू कर देता है। यदि नीलम अनुकूल न बैठे तो भारी नुक्सान हो जाती है।

गोमेद: - (राहु)

गोमेद रत्न धारण करने से अनेकों रोग नष्ट होते है। धन-संपत्ति, सुख, संतान, वृद्धि, वकालत व राज्यपक्ष आदि की उन्नति के लिए अत्यंत लाभकारी है। शत्रुनाश हेतु भी इसका प्रयोग प्रभावी रहता है।

लहसुनिया: - (केतु)

लहसुनिया रत्न धारण करने से भूत-प्रेत की बाधा समाप्त हो जाती है। संतान सुख, धन की वृध्दि एवं शत्रु व रोग का नाश होता है।

माणिक: - (सूर्य)

सावधानी: -

१) माणिक के साथ हीरा, नीलम, लहसुनिया, गोमेद धारण न करें।
२) मोती के साथ हीरा, नीलम, पन्ना, गोमेद, लहसुनिया की वर्जना हैं।
३) मूंगा के साथ हीरा, पन्ना, नीलम, गोमेद, लहसुनिया न पहनें।
४) पन्ना के साथ मोती, मुंगा की वर्जना हैं।
५) पुखराज के साथ हीरा, नीलम, गोमेद, लहसुनिया धारण न करें।
६) हीरा के साथ माणिक्य, मोती, मुंगा, पीला पुखराज न पहनें।
७) नीलम के साथ माणिक, मुंगा, मोती न पहनें।
८) लहसुनिया के साथ माणिक, मुंगा, मोती व पीला पुखराज धारण न करें।

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